मंगलवार, 7 अगस्त 2012

किस तरह का था प्रेम और कौन थी फिजा !


तीन दिन पहले हुई फिजा की मौत, शव पर रेंग रहे थे कीड़े

Aug 06, 12:08 pm
मोहाली/नई दिल्ली। हरियाणा की पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता एवं हरियाणा के पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्रमोहन से प्रेम विवाह कर और बाद में तलाक लेकर चर्चा में आई अनुराधा बाली उर्फ फिजा सोमवार को मोहाली स्थित अपने आवास पर मृत मिली। 39 साल की फिजा का शव उसके कमरे में बेड पर पड़ा मिला। शव पूरी तरह फूल गया व काला पड़ गया था। शव से दुर्गध आ रही थी और उस पर कीड़े रेंग रहे थे। शव के पास शराब का एक खाली पव्वा, एक खाली गिलास और एक सिगरेट की डिब्बी पड़ी मिली। पुलिस का प्रारंभिक आकलन है कि फिजा की मौत तीन-चार दिन पहले हो चुकी थी। पुलिस मौत का कारण नशे की अधिक मात्रा मानकर चल रही है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक फिजा ने तीन दिन पहले ही आत्महत्या कर ली थी। फिजा घर में अकेले रह रही थी, इसलिए वारदात का पता नहीं चल पाया। जब पड़ोसियों को घर से बदबू आने लगी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस का कहना है कि प्रॉपर्टी विवाद और पड़ोसियों से परेशान होकर फिजा ने मौत को गले लगा लिया।
धर्म परिवर्तन कर आई थी सुर्खियों में
फिजा उस वक्त सुर्खियों में आई थी, जब उसने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल के बेटे और पूर्व उप मुख्यमंत्री चंद्र मोहन से शादी कर ली थी। शादी करने के लिए दोनों ने अपना धर्म बदल लिया था। चंद्र मोहन ने अपना नाम चाद मोहम्मद रख लिया था, जबकि अनुराधा बाली ने अपना नाम फिजा रख लिया था। शादी के कुछ वक्त बाद ही दोनों अलग हो गए थे। चाद मोहम्मद उर्फ चंद्र मोहन से अलग होने के बाद फिजा अवसाद में चली गई थी। वह हरियाणा में पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता रह चुकी है।
हाल ही में हुई थी गिरफ्तार
फिजा को जून में मोहाली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। फिजा को पड़ोसियों से गाली-गलौज करने और मारपीट के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जनवरी में संजय अग्रवाल और फिजा के बीच हाथापाई हुई थी। फिजा के घर के पास एक ग्राउंड है। यहा बच्चे खेल रहे थे। फिजा ने उनको खेलने से मना कर दिया। इस बीच संजय अग्रवाल वहा पहुंच गए। फिजा ने संजय को गालिया देनी शुरू कर दी और उनके साथ मारपीट की।
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(जागरण से साभार) 


बुधवार, 25 जुलाई 2012

वो दिन कब आएगा !


जाते जाते महामहिम श्रीमती प्रतिभा पाटिल ने महसूश किया की देश भ्रष्टाचार में डूबा है, और जल्द ही इससे मुक्त होगा . जबकि नए राष्ट्रपति विवादों में घिरे हुए आ रहे हैं की ये भ्रष्टाचार से ही चुनाव जीते हैं -


भारत जल्द ही भ्रष्टाचार मुक्त देश बनेगाJul 25, 12:28 am

नई दिल्ली। पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के मौके पर मंगलवार को अपने विदाई संबोधन में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने विश्वास जताया कि भारत जल्द ही भ्रष्टाचार मुक्त देश बनेगा। पाटिल ने सलाह दी कि सरकार और जनता को मिलकर सुशासन और विकास के शत्रु भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़नी चाहिए।
राष्ट्रपति के तौर पर राष्ट्र के नाम आखिरी संबोधन में उन्होंने कहा, 'आपके चारों ओर हो रही घटनाओं को समझने की क्षमता आपमें है, अपने विचारों को व्यक्त कीजिए। मुझे यकीन है कि हम भारत को मजबूत, प्रगतिशील, संयुक्त और भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाने में नाकामयाब नहीं होंगे।' दहेज, बाल विवाह, कन्या भ्रूण हत्या और जन्म के बाद लड़कियों को मार डालने की सामाजिक बुराई को विकास की राह में बाधा करार देते हुए उन्होंने सभी से पुरजोर तरीके से इन कुरीतियों के खिलाफ उठ खड़े होने का आह्वान किया। पाटिल के मुताबिक इन कुप्रथाओं के खिलाफ सरकार, सामाजिक संगठनों, एनजीओ और अन्य स्वैच्छिक संस्थाओं को मिलकर काम करना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं में प्रतिभा और योग्यता की कमी नहीं है, लेकिन सामाजिक अवरोधों और पूर्वाग्रहों की वजह से हम लैंगिक समानता का लक्ष्य पाने से अभी कोसों दूर हैं। लोकतांत्रिक ढांचे में आर्थिक वृद्धि कैसे हासिल की जा सकती है, भारत इसका उदाहरण है। यह आर्थिक तरक्की लोगों की खुशियों और प्रगति में तब्दील होगी। राष्ट्रपति ने खाद्य सुरक्षा का लक्ष्य पाने के लिए कृषि उत्पादकता बढ़ाए जाने पर जोर दिया। साथ ही वर्षा आधिक्य और शुष्क क्षेत्रों में खेती के लिए नए तौर तरीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि कृषि शोध संस्थान और ज्ञान विस्तार के तंत्र निचले स्तर पर ग्राम पंचायतों से समन्वय कर उन्नत तकनीकों और खेती की आधुनिक प्रक्रिया को किसानों तक पहुंचाएंगे।

शनिवार, 16 जून 2012

भ्रष्टाचार का अड्डा

हजारों सालों के इस सड़े 'जातिवादी' विश्वविद्यालय को बंद क्यों नहीं  कर दिया जाता ?
जो केवल और केवल भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है
(न जाने कितनों को अपढ़ बनाये रखने के काम संलिप्त विश्वविद्यालय)
परीक्षा अभिलेखों में हेराफेरी, फंसा सत्यापन
Jun 16, 01:48 am
संस्कृत विश्वविद्यालय
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-पांच हजार अंकपत्रों की जांच लंबित, रिपोर्ट बनाने में हीलाहवाली
वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के परीक्षा अभिलेखों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी प्रकाश में आयी है। इसके चलते शास्त्री-आचार्य के हजारों परीक्षाफल संदिग्ध घोषित कर दिए गए हैं। ऐसे में विभिन्न डायटों व अन्य संस्थानों से आ रहे अंकपत्रों का सत्यापन नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में परीक्षा गोपनीय विभाग में लगभग पांच हजार अंकपत्र, सत्यापन के लिए पेंडिंग पड़े हैं।
सूत्रों के अनुसार शास्त्री-आचार्य के विभिन्न सत्रों के टेबुलेशन रजिस्टर के पन्ने बदल दिए गए हैं। इतना ही नहीं परीक्षा अभिलेखों में तमाम कटिंग कर परिणामों को प्रभावित कर दिया गया हैं। संज्ञान में आने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने ऐसे अभिलेखों को संदिग्ध घोषित कर दिया है, साथ ही अंकपत्रों के सत्यापन के लिए चार सदस्यीय समिति भी गठित की गई है। इसमें प्रो. केदारनाथ त्रिपाठी, प्रो. रामकिशोर त्रिपाठी, डॉ. शीतला प्रसाद उपाध्याय व डॉ. सूर्यकांत सदस्य हैं। संदिग्ध अभिलेखों में दर्ज परीक्षार्थियों के विवरण का सत्यापन समिति के माध्यम से किया जाता है। दूसरी ओर सामान्य जांच परीक्षा गोपनीय विभाग करता है। अभिलेखों की लीपापोती के चलते कर्मचारियों के साथ अब जांच समिति भी सत्यापन करने से कतरा रही है। यही कारण है कि पिछले कई महीने से काफी संख्या में अंकपत्रों का सत्यापन फंसा हुआ है।
दोनों प्रति में गड़बड़झाला
शास्त्री-आचार्य की विभिन्न कक्षाओं के टेबुलेशन रजिस्टर दो प्रतियों में तैयार किए जाते है। अभिलेखों का रखरखाव ठीक न होने के कारण दोनों प्रतियों में गड़बड़झाला है। इसके चलते कर्मचारी भी सत्यापन करने से कतराते है।
संगणक केंद्र से हो रहा मिलान
अभिलेखों में हेराफेरी को देखते हुए अब अंकपत्रों का सत्यापन संगणक केंद्र में दर्ज रिकार्ड से मिलान कर तैयार किया जा रहा है। कई स्तर पर मिलान होने के कारण भी सत्यापन में देरी हो रही है।
अभिलेखों के नवीनीकरण की योजना ठंडे बस्ते में
परीक्षा अभिलेखों की संदिग्धता को देखते हुए कुलपति प्रो. बिंदा प्रसाद मिश्र ने पिछले दस वर्षो के परीक्षा रिकार्ड के नवीनीकरण की योजना बनाई है। इसके तहत सारे रिकार्ड कंप्यूटराइज्ड किए जाने हैं। इसे सर्वर के माध्यम से विभिन्न अनुभागों में लगे कंप्यूटर से जोड़ा जाना है। लगभग छह माह पहले बनी यह योजना फिलहाल तो ठंडे बस्ते में है।
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गौतम बुद्ध विवि की जांच रिपोर्ट लोकायुक्त को भेजी

Updated on: Mon, 09 Jul 2012 01:03 AM 
जागरण ब्यूरो, लखनऊ : शासन ने ग्रेटर नोएडा के गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में अनियमितताओं की जांच रिपोर्ट लोकायुक्त को भेज दी है। लोकायुक्त ने विश्वविद्यालय में हुईं कथित अनियमितताओं के संबंध में शासन से जांच रिपोर्ट तलब की थी।
गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के निर्माण और वहां के पुस्तकालय में अनियमितताओं के संबंध में लोकायुक्त के कार्यालय में परिवाद दाखिल किया गया था। मामले की जांच में लोकायुक्त ने शासन से विश्वविद्यालय में अनियमितताओं की विस्तृत जांच कराकर उसकी रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। इस पर शासन ने विश्वविद्यालय के कुलपति को पत्र लिखकर अनियमितताओं की जांच कराने का निर्देश दिया था। अनियमितताओं की जांच विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने की थी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी गई थी जिसे शासन ने लोकायुक्त कार्यालय को उपलब्ध करा दिया है।

बुधवार, 23 मई 2012

भ्रष्टाचार की महारानी

(अमर उजाला से)

एनआरएचएम घोटाले में मायावती का भी नाम

जौनपुर/ब्यूरो
Story Update : Monday, May 14, 2012    9:04 AM
mayawati also named in NRHM scandal
एनआरएचएम घोटाले में बसपा मुखिया व पूर्व सीएम मायावती का भी नाम आ रहा है। काफी दिनों तक परिवार कल्याण की मुखिया वह खुद रही हैं। यह खुलासा प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री अहमद हसन ने किया है।

सबका हिसाब लेगी CBI
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एनआरएचएम घोटाले के चलते स्वास्थ्य विभाग की छवि खराब हुई है। मंत्री, माफिया और कुछ अधिकारी आज जेल में हैं। कुछ माफिया किस्म के लोगों से साठगांठ कर पूरी योजना का बंटाधार किया गया। घोटाले में बीएसपी मुखिया मायावती का नाम भी आ रहा है। सीबीआई सबका हिसाब लेगी। हमने सीबीआई को जांच में पूरा सहयोग देने का भरोसा दिया है। स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के क्रम में दो महीने के भीतर आधा दर्जन से अधिक चिकित्सक निलंबित किए जा चुके हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सरकार के पास फंड की कमी नहीं है। अस्पतालों में तीन दिन के बजाय अब मरीजों को पांच दिन की दवा देने के आदेश दिए गए हैं।

दवा खरीद की व्यवस्था विकेंद्रीकृत
निगोह के कराह पूजन कार्यक्रम से लौटे अहमद हसन ने पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वसुलभ और पारदर्शी बनाने की बात कही। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश से दवा माफिया का कॉकस तोड़ा जाएगा। दवा खरीद की व्यवस्था विकेंद्रीकृत की जा रही है। जिला स्तर पर दवा खरीद होगी। खरीद के नियम, दवा कंपनियों के नाम, दवाओं के रेट तय किए जा रहे हैं।

1500 चिकित्सकों की तैनाती
मंत्री ने माना कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और समुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि सुधारने के प्रयास शुरू हो गए हैं। दस वर्ष से अधिक समय से एक स्थान पर तैनात डाक्टर और कर्मचारियों के तबादले किए जा रहे हैं। अभी हमने 1500 चिकित्सकों की तैनाती की है। चिकित्सकों से ही पोस्टिंग के लिए तीन विकल्प मांगे थे ताकि पारदर्शिता बनी रहे। संविदा चिकित्सकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। वे काम करते रहेंगे और उनकी संविदा अपने आप रिन्यू हो जाएगी। संविदा नवीनीकरण के नाम पर चिकित्सकों को परेशान नहीं किया जाएगा।

भ्रूण हत्या को गंभीर समस्या बताते हुए सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। कहा कि पीएनडी एक्ट के तहत आज तक किसी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। हमने कहा है कि भ्रूण की जांच करने वाले और भ्रूण हत्या में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
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माया राज के सावित्री बाई फुले योजना में भी घोटाला उजागर

रमण शुक्ला/लखनऊ
Story Update : Wednesday, May 23, 2012    12:26 AM
Maya government Savitri Bai Phule Scheme scam exposed
एनआरएचएम, मनरेगा, चीनी मिल बिक्री और टीईटी जैसे घोटाले के बाद अब माया राज की एक और लोकप्रिय योजना सावित्री बाई फुले बालिका शिक्षा मदद में भी घोटाला सामने आया है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से सूबे में संचालित इस योजना में फर्जी बीपीएल कार्ड पर छात्राओं को शिक्षा मदद राशि और साइकिल देने का खुलासा विभागीय ऑडिट रिपोर्ट में किया गया है। विभागीय जांच में जो खुलासे हुए हैं उसकी हकीकत बेहद चौंकाने वाले हैं। कई जिलों की फाइलों में गड़बड़ियां सामने आने के बाद जांच उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश की गई है।

पिछले चार वित्तीय वर्ष यानि 2008-09 से लेकर 2010-11 तक के ऑडिट के दौरान बीपीएल श्रेणी की सैकड़ों ऐसी छात्राओं के नाम सामने आए हैं जिनके खाते में एक वित्तीय वर्ष में दो-दो बार भुगतान दिखाया गया है। ऑडिटर्स ने फर्जी बीपीएल कार्ड बनाकर छात्राओं को भुगतान करने, शासन के निर्देशों को दरकिनार सरकारी खजाने से पैसा निकालने और महीनों तक पैसा बैंक खाते में रखने पर सवाल खड़ा किया है।

ऑडिट में रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्राओं को दी गई कुल मदद राशि में 75 फीसदी भुगतान फर्जी बीपीएल कार्ड पर किया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि सीधे तौर पर अनियमितता के लिए स्कूल प्रिंसिपल और जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को जिम्मेदार ठहराया गया है।

कहां-कहां गड़बड़ियां
सादे बीपीएल कार्ड पर नाम-पता लिखकर छात्राओं को बीपीएल दिखा दिया गया है। ऑडिटर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सैकड़ों छात्राओं के बीपीएल कार्ड पर व्हाइटनर लगाकर नाम बदला गया है। ऐसे बीपीएल कार्ड में न तो यूनिट संख्या दर्ज है और न ही कार्ड जारी करने वाले अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं।

ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वाधिक फर्जी बीपीएल कार्ड पर भुगतान वित्तविहीन स्कूलों में किया गया है। इसी तरह साइकिल खरीद में भारी गड़बड़ियां की गई हैं। किसी भी साइकिल की खरीद पर गुणवत्ता को लेकर कोई गारंटी नहीं ली गई। कोई स्टॉक रजिस्टर नहीं बनाया गया। कितनी साइकिल की खरीद हुई और किन-किन छात्राओं को स्टोर से साइकिल भिजवाई गई। इसका कोई ब्योरा स्टॉक रजिस्टर में नहीं है।

अफसरों ने महीनों पहले सरकारी खजाने से पैसा निकाल कर बैंकों में खाता खुलवाकर जमा कर दिए। ऐसा करके अफसरों ने बैंकों से लाखों रुपये की कमाई की। वहीं छात्राओं के खाते में फंड ट्रांसफर करने में भी लाखों रुपये की अनियमितता की गई है। सैकड़ों ऐसे चेक बना दिए गए जिसमें खाता नंबर गलत डाल दिया गया था। इसी तरह लाखों रुपये का फर्जी भुगतान करने की गड़बड़ी भी पकड़ में आई है।

क्या थी योजना
2009 में मुख्यमंत्री मायावती ने 11वीं और 12वीं में पढ़ने वाली बीपीएल एवं अन्त्योदय छात्राओं को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से सावित्री बाई फुले बालिका शिक्षा मदद योजना का ऐलान किया था। योजना के तहत 11वीं में पढ़ने वाली छात्राओं को 15,000 रुपये व एक साइकिल और 12वीं में पढ़ने वाली छात्राओं को 10,000 रुपये देने का प्रावधान किया गया था।

छात्राओं को योजना का लाभ वित्तीय वर्ष 2008-09 से दिया जा रहा है। योजना लागू करने के साथ सरकार ने सहायता राशि और साइकिल जिले स्तर पर खरीदने एवं बांटने का निर्णय लिया था। राशि का भुगतान छात्राओं के बैंक खाता खुलवाकर सीधे खाते में करने के निर्देश दिए गए थे।

सावित्री बाई फुले योजना में छात्राओं को मदद शिक्षा राशि और साइकिल देने में अगर अनियमितता की बात सामने आएगी तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। गड़बड़ी करने वाले को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल हमें इसकी कोई जानकारी नहीं है।-वासुदेव यादव, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा विभाग

2007 से 2011 के बीच हुए चर्चित घोटाले
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- एनआरएचएम घोटाला:--5700 करोड़
- मनरेगा घोटाला:--12000 करोड़
- चीनी मिल बिक्री घोटाला:--1180 करोड़
- टीईटी घोटाला:--120 करोड़
- फीस प्रतिपूर्ति घोटाला:--20-25 करोड़
- नोएडा प्लाट आवंटन घोटाला:--5000 करोड़
- शौचालय निर्माण घोटाला:--2900 करोड़
- ढैंचा बीज घोटाला:--56 करोड़
- गेहूं बीज घोटाला:--50 करोड़
- बाण सागर परियोजना घोटाला:--1286 करोड़
- सरयू परियोजना घोटाला:--उपलब्ध नहीं
- यूपीएसआईडीसी भर्ती घोटाला:--उपलब्ध नहीं


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सोमवार, 21 मई 2012

अब तक की सबसे भ्रष्ट सरकार

मनमोहन सरकार अब तक की सबसे भ्रष्ट

May 21, 03:23 am
नई दिल्ली। आठ साल सत्ता में रहने के बाद कांग्रेसनीत संप्रग सरकार धीरे-धीरे अपनी जमीन खो रही है। एक ताजा सर्वेक्षण में मनमोहन सरकार को आजादी के बाद सबसे भ्रष्ट सरकार का दर्जा दिया गया है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की लोकप्रियता घटी है। जबकि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी लोकप्रियता के मामले में सबसे आगे हैं। यह सर्वेक्षण ऐसे समय आया है जब संप्रग-2 सरकार 22 मई को ही अपने तीन साल पूरे करने जा रही है।
अप्रैल-मई के दौरान देश के 28 शहरों में किए गए एबीपी न्यूज-नील्सन के सर्वे के मुताबिक संप्रग के मुकाबले भाजपा की साख मजबूत हुई है। सर्वेक्षण के मुताबिक अगर आज लोकसभा चुनाव हो जाएं, तो भाजपा को 28 फीसदी वोट मिलेंगे, जबकि कांग्रेस को 20 फीसदी से ही संतोष करना होगा। हालांकि, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अच्छा या बहुत अच्छा बताने वालों की तादाद 37 फीसदी रही। संप्रग सरकार प्रदर्शन के मामले में औसत अंक 2.95 के साथ नीचे उतरी है, जबकि पिछले साल उसे 3.22 औसत अंक मिले थे।
सर्वे में शामिल 57 फीसदी लोगों का कहना था कि आजादी के बाद संप्रग-2 सरकार देश की सबसे भ्रष्ट सरकार है। 25 फीसदी लोग चाहते हैं कि सरकार भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए तत्काल कदम उठाए। सर्वे के मुताबिक 24 फीसदी लोगों ने खाद्य व पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर लगाम के लिए निगरानी की बात कही।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को लोगों ने 17 फीसदी वोट के साथ देश के सबसे अच्छे नेता के तौर पर स्थापित किया है। जबकि मनमोहन सिंह इस मामले में उनसे महज एक फीसदी पीछे रहे। राहुल की लोकप्रियता पिछले वर्ष की 19 फीसदी से घटकर 13 फीसदी रह गई। सोनिया पिछले साल के 14 फीसदी के मुकाबले इस साल नौ फीसदी पर ही रह गई।

रविवार, 20 मई 2012

शूटर दे दो एमएलसी साहब!


सीबीआइ ने कहा शूटर दे दो एमएलसी साहब!

May 19, 10:19 pm
लखनऊ [जाब्यू]। राजधानी के डबल सीएमओ मर्डर केस की जांच कर रही सीबीआइ ने शनिवार को दो चक्रों में बसपा एमएलसी संजीव उर्फ रामू द्विवेदी से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की। सीबीआइ अधिकारियों ने बसपा एमएलसी से सीएमओ मर्डर टीम में शामिल शूटरों के बारे में सवाल किया और कहा कि आप चाहो तो शूटर उपलब्ध हो सकते हैं। अभिसूचना संकलन में सीबीआइ को राजधानी के डबल सीएमओ मर्डर केस में फरार चल रहे दो शूटरों से रामू के करीबी रिश्ते की खबर लगी है। इसीलिए उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पहले चक्र की पूछताछ में रामू काफी संयत रहे, लेकिन दोबारा सीबीआइ अधिकारियों के सवालों ने उन्हें पसीने-पसीने कर दिया।
सीबीआइ टीम ने शुक्रवार को पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा से लंबी पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ते ही रामू द्विवेदी को फोन किया। उनकी लोकेशन पूछी तो पता चला कि वह देवरिया में हैं। सीबीआइ के एएसपी हरी सिंह ने रामू को शनिवार सुबह दस बजे विवेकानंद मार्ग स्थित राज्य अतिथि गृह में पहुंचने को कहा। रामू 11 बजकर 35 मिनट पर अतिथि गृह पहुंचे। आधे घंटे तक उनकी नोटिस नहीं ली गयी। बाद में अधिकारियों ने उनसे थोड़ी देर तक पूछताछ की और कहा कि ठीक साढ़े तीन बजे हाजिर हो जाओ। साढ़े 12 बजे रामू अतिथि गृह से मुस्कुराते हुए बाहर निकले और ठीक साढ़े तीन बजे दोबारा अतिथि गृह में पहुंचे।
सूत्रों के मुताबिक रामू से सबसे पहले यही सवाल हुआ कि देवरिया में कौन-कौन शूटर हैं और किससे किससे उनकी आमदरफ्त है? रामू ने कहा कि मैं जनप्रतिनिधि हूं और शूटरों के बारे में क्या जानूं। फिर सीबीआइ अधिकारियों ने उनके पुराने केस की सूची सामने कर दी। रामू बोले गैंगस्टर और एक दो केस छोड़कर शेष समाप्त हो गए हैं। सीबीआइ अधिकारियों ने कहा कि गैंगस्टर को शूटरों के बारे में जानकारी नहीं है? रामू ने कहा कि छात्र जीवन और आज के जीवन में अंतर है। सीबीआइ अधिकारियों ने कहा कि एमएलसी साहब नेपाल में फरारी काट रहा शूटर आपके करीब है, उसे बुलवा दो। रामू ने कहा कि मैं उसे नहीं जानता। सीबीआइ ने दोनों के बीच आमदरफ्त होने के सबूत होने का दावा किया। रामू चुप्पी साध गए। फिर उनके एकाउंट, फर्म और पुराने इतिहास पर भी पूछताछ होती रही। रामू ने कहा कि मेरी कोई फर्म नहीं है। थोड़ी देर के लिए रामू को डाक्टर शुक्ला के भी सामने किया गया।
सूत्रों के मुताबिक सीबीआइ रामू द्विवेदी से अनंत मिश्रा और डाक्टर शुक्ला की टीम से संबंधों के बारे में भी पूछताछ करती रही। इस दौरान रामू ने कहा कि इन लोगों से उनके संबंध नहीं रहे। अलबत्ता बाबू सिंह कुशवाहा एंड कंपनी से उन्होंने करीबी संपर्क बताया। सीबीआइ अधिकारियों ने रामू के करीबी सांसद से जब अनंत मिश्रा से अच्छे संबंधों का उदाहरण दिया तो उन्होंने यह माना कि उन लोगों के अच्छे संबंध रहे हैं। ऐसे ही सवालों के बीच सीबीआइ के अधिकारी रामू द्विवेदी से बार-बार शूटर और पिस्टल के बारे में तहकीकात करते रहे। सीबीआइ ने उनसे बार-बार यही कहा कि वह चाहें तो शूटर को ला सकते हैं। रामू को सहयोग का मौका देते हुए सीबीआइ अधिकारियों ने कभी भी बुलाए जाने की नसीहत के साथ शाम पांच बजकर बीस मिनट पर छोड़ दिया। वापसी में रामू ने मीडिया से कहा कि उनको सीबीआइ ने बुलाया था। वह उनके सवालों को जवाब देकर जांच में सहयोग कर रहे हैं। ध्यान रहे कि सीबीआइ रामू से पहले भी पूछताछ कर चुकी है।
गवाह बन सकते हैं डा. शुक्ला:-
डबल सीएमओ मर्डर केस में रिमांड पर लिए गए पूर्व सीएमओ डाक्टर एके शुक्ला पूरे दिन सहज रहे। वह दिन भर टीवी देखते रहे और बीच बीच में अपने अधिवक्ता रामकेवल त्रिपाठी और आशीष कुमार शुक्ला से परामर्श लेते रहे। कभी कभार सीबीआइ अधिकारियों ने उनसे दस बीस मिनट बातचीत की। सूत्रों का कहना है कि शुक्ला सीबीआइ का सहयोग करने को तैयार हैं। वह सीबीआइ के गवाह भी बन सकते हैं। सीबीआइ मुख्यालय से आए एक अधिकारी से डाक्टर शुक्ला की रात्रि आठ बजे मुलाकात होनी है।
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ब्रह्मण  जैसा शातिर कोई नहीं, इलाका कोई भी हो सकता है. 
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यूपी में अब एसी बस घोटाला

May 21, 12:57 am
लखनऊ। सूबे में नई सरकार के गठन के बाद घोटालों की श्रृंखला खुलने लगी है। अब परिवहन निगम में भी घोटाले की परत खुल रही है। 200 सीएनजी बसों के निर्माण में गुणवत्ता घटिया होने के मामले को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने जांच के रडार पर ले लिया है। परिवहन निगम में लक्जरी कारों की खरीद से लेकर अतिथि गृहों में भारी खर्च से बेमतलब की हुई सजावट सहित कई मामलों की पड़ताल शुरू हो गई है।
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने परिवहन निगम में हुई अनियमितताओं को लेकर जांच के दस बिंदु निर्धारित किए हैं। सबसे पहला बिंदु बाहरी माध्यमों से सीएनजी बसों का निर्माण कराने का ही है। बाहरी माध्यम से बसों की सीटें बनवाए जाने को भी जांच के दायरे में लाया गया है। एसी बसों के किराए में पीक सीजन के दौरान 20 फीसद छूट देने के मौखिक आदेश के कारण व निहितार्थ, दोनों खंगाले जा रहे हैं। यात्री सुविधा धन के दुरुपयोग की शिकायतों की जांच हो रही है। जांच एजेंसी की दिलचस्पी इस बात में भी है कि बस अड्डों का निर्माण परिवहन विभाग ने खुद करने की बजाय जल निगम के बाहरी पेटी ठेकेदारों से क्यों कराया।
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने कैसरबाग बस अड्डे को तोड़कर दोबारा बनाए जाने को भी जांच के दायरे में ले लिया है। इसकी पड़ताल की जा रही है कि 50 लाख रुपये से अधिक की अत्याधुनिक कारों की खरीद किस विधि से की गई। इसके अलावा टायर रीट्रीडिंग मैटीरियल के लिए सहारनपुर के एक व्यक्ति को अलग-अलग कई नामों से खरीद का आदेश जारी करने, बीते तीन वर्षों में निगम में खरीदे गए एअर कंडीशनर व कारों का उपयोग व उनका भौतिक सत्यापन सुनिश्चित करने तथा परिवहन निगम के अतिथि गृहों की साज-सज्जा पर अनावश्यक किए गए खर्च को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है।
तलब की जानकारी
आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक से विभिन्न कार्यों से जुड़े रहे अधिकारियों की जानकारी तलब की है। प्रबंधन से पूछा है कि सभी बिंदुओं से संबंधित कार्य निगम के किस विभाग से कराये गए। इन कार्यों से जुड़े अधिकारियों के नाम और पदनाम भी मांगे गए हैं। इन विभागों के पर्यवेक्षण अधिकारियों के भी नाम और पदनाम तलब किए गए हैं। इन कार्यों के समय निगम में अपर प्रबंध निदेशक के पद पर कार्यरत रहे एक अधिकारी की हर बार तैनाती का पूर्ण विवरण मांगा गया है। साथ ही जांच को समय पर पूरा करने के लिए निगम से एक ऐसा नोडल अधिकारी नियुक्त करने को कहा गया है, जिसे तथ्यों की जानकारी हो। इस बाबत निगम के प्रबंध निदेशक आलोक कुमार से संपर्क किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी।


शनिवार, 19 मई 2012

विधायकों व मंत्री के ठिकानों पर छापे


झारखंड: 14 विधायकों व मंत्री के ठिकानों पर छापे

May 18, 08:54 am
रांची [जासं]। इसी साल हुए राज्यसभा चुनाव में विधायकों के खरीद-फरोख्त [हॉर्स ट्रेडिंग] मामले की जांच कर रही सीबीआइ ने शुक्रवार को झारखंड में 14 विधायकों और प्रदेश सरकार के मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के आवास पर छापेमारी की। जांच के सिलसिले में सीबीआइ ने झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल में एक साथ 36 ठिकानों पर कार्रवाई की। इन छापेमारी में सीबीआइ को कौन से दस्तावेज और संपत्ति मिली है। इसकी घोषणा अभी नहीं की गई है। कार्रवाई में सीबीआइ ने लैपटॉप, बैंक पासबुक और निवेश संबंधी दस्तावेज जांच के लिए जब्त किए हैं।
30 मार्च को मतदान के दिन रांची में 2.15 करोड़ रुपये बरामद होने के बाद राज्यसभा चुनाव रद कर दिया गया था। बरामद धनराशि निर्दलीय प्रत्याशी आरके अग्रवाल से संबंधित होने के साक्ष्य मिले थे। इसके बाद झारखंड हाई कोर्ट ने मामले की जांच सीबीआइ से कराने का आदेश दिया। शुक्रवार को सीबीआइ ने जिन स्थानों पर छापेमारी की उनमें सरकार में शामिल आजसू के तीन विधायक व एक मंत्री, कांग्रेस व राजद के तीन-तीन विधायक, भाजपा व झामुमो के दो-दो विधायक और जदयू की एक विधायक शामिल हैं। चुनाव से दूर रहे झारखंड विकास मोर्चा [झाविमो] के विधायक इस कार्रवाई की जद में नहीं आए।
आजसू कोटे से राज्य सरकार में मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी के रांची और रजरप्पा [रामगढ़] स्थित आवास पर छापेमारी हुई। झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन की विधायक पुत्रवधू सीता सोरेन और बिहार विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी की विधायक पुत्री डॉ. सुधा चौधरी के आवासों पर भी सीबीआइ ने छापेमारी की है। चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रहे पवन धूत के कोलकाता स्थित तीन ठिकानों और पूर्व भाजपा सांसद अजय मारू व इनके भाई पवन मारू के रांची स्थित आवास पर भी जांच एजेंसी ने कार्रवाई की।
भाजपा विधायक के आवास से 15 लाख मिले
खबर है कि भाजपा विधायक अरुण मंडल के आवास से सीबीआइ को 15 लाख रुपये मिले हैं। एजेंसी इस धनराशि प्राप्ति के स्त्रोत का पता लगा रही है।