शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

कब बहन जी के भाई के घर छापा मारेगी सी बी आई

अमर उजाला से साभार-

माया के करीबी पोंटी चड्ढा के मॉल से 100 करोड़ बरामद

नई दिल्ली।
Story Update : Wednesday, February 01, 2012    8:24 PM
Ponty Chadha 100 million recovered from the mall
उत्तर प्रदेश के प्रमुख व्यवसायी पोंटी चड्ढा के मॉल से आयकर विभाग ने बड़ी संख्या में नकदी बरामद की है। पोंटी चड्ढा को यूपी की मुख्यमंत्री मायावती का करीबी माना जाता है। आयकर विभाग को नोएडा स्थित उनके सेंटरस्टेज मॉल से एक बड़ी तिजोरी मिली है, जिसमें करीब 100 करोड़ रुपए होने का अनुमान लगाया जा रहा है। यह तिजोरी बेसमेंट में छिपाकर रखी गई थी। आयकर विभाग ने तिजोरी को कब्जे में ले लिया है। साथ ही आयकर विभाग ने पोंटी चड्ढा को इस मामले में नो‌टिस जारी कर दिया है।

14 दिन में हाजिर होने का नोटिस
आयकर विभाग ने तिजोरी को सील करके, पोंटी चड्ढा को 14 दिन में हाजिर होने का नोटिस दिया है। हालांकि यह तिजोरी अभी नहीं खोली जाएगी। अगर पोंटी चड्ढा 14 दिनों के अंदर हाजिर नहीं होते हैं तो एक और नो‌टिस उन्हें भेजा जाएगा, यदि वे फिर भी हाजिर नहीं होते तो फिर आयकर विभाग इस तिजोरी को खोलेगा। आयकर विभाग पोंटी चड्ढ़ा के दिल्ली, नोएडा, मुरादाबाद, पंजाब और मुंबई स्थित ठिकानों पर छापे मारी कर रहा है।

माया के करीबी हैं पोंटी
पोंटी को मुख्‍यमंत्री मायावती का करीबी माना जाता है। प्रदेश में शराब का सारा कारोबार चड्ढा की कंपनी करती है। वेब सिनेमा के ऑनर भी पोंटी हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से तुरंत पहले इस तरह की कार्रवाई को सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

माया के करीबी पोंटी चड्ढा के ठिकानों पर छापा

लखनऊ/इंटरनेट।
Story Update : Wednesday, February 01, 2012    1:29 PM
IT raids liquor baron Ponty Chadha
आयकर अधिकारियों ने बुधवार को मायावती के करीबी कारोबारी पोंटी चड्ढा के दिल्ली और उत्तर प्रदेश स्थित ठिकानों छापेमारी की। सूत्रों के मुताबिक पोंटी चड्ढा के दिल्ली समेत करीब 25 ठिकानों पर ये छापेमारी की जा रही है।

कैश को लेकर छापेमारी
दिल्ली के अलावा नोएडा, लखनऊ, मुरादाबाद और चंडीगढ़ के प्रतिष्ठानों पर छापेमारी की गई है। आयकर विभाग को उनके ठिकानों से भारी मात्रा में नकदी मिलने की उम्‍मीद है। बताया जा रहा है कि चुनाव के दौरान कैश को लेकर यह छापेमारी की जा रही है।

माया के करीबी हैं पोंटी
पोंटी को मुख्‍यमंत्री मायावती का करीबी माना जाता है। प्रदेश में शराब का सारा कारोबार चड्ढा की कंपनी करती है। वेब सिनेमा के ऑनर भी पोंटी हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से तुरंत पहले इस तरह की कार्रवाई सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

मंगलवार, 24 जनवरी 2012

लूट की छूट


एनएचआरएम घोटाले में एक और बलि!

Feb 11, 08:15 am
वाराणसी। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले की जांच के दौरान शुक्रवार एक और डिप्टी सीएमओ की जान चली गई। वाराणसी जिले के पिंड्रा स्वास्थ्य केंद्र पर जांच के लिए सीबीआइ टीम आने की सूचना पर डॉ. शैलैष वहां जा रहे थे। रास्ते में हादसे का शिकार हो गए। गौरतलब है कि एनआरएचएम घोटाले में ही स्वास्थ्य विभाग के तीन अफसरों की हत्या हो चुकी है। एक अन्य ने खुदकुशी कर ली थी। लोगों का कहना था कि डॉ. शैलेष की मौत मार्ग दुर्घटना में हुई लेकिन इसके लिए भी दागी एनआरएचएम को ही बनना पड़ा। सूत्रों के अनुसार गुरुवार को सीबीआइ टीम ने सीएमओ दफ्तर में दस्तावेज खंगाले थे। शुक्रवार को एनआरएचएम के डिप्टी सीएमओ को बुलाने का निर्देश दिया था। चर्चा रही कि सीएमओ दफ्तर से रवाना होने के बाद डॉ. शैलेष ने कुछ चिकित्सक साथियों व स्वास्थ्य केंद्र के संबंधित बाबू से इस बाबत मोबाइल पर बात भी की थी। लेकिन मौके पर पहुंचने से पहले ही दुर्घटना का शिकार हो गए।
...........................................................................................

घोटाले में एक और खुदकुशी

लखनऊ/अमर उजाला ब्यूरो।
Story Update : Tuesday, January 24, 2012    4:31 AM
In another suicide scandal
एनआरएचएम घोटाले में आरोपी और जल निगम के सीएंडडीएस में प्रोजेक्ट मैनेजर सुनील वर्मा ने सोमवार सुबह विकासनगर स्थित अपने आवास में खुद को गोली मारकर जान दे दी। सीबीआई ने चार जनवरी को उनके घर छापामारी कर पूछताछ की थी। सुइसाइड नोट में उन्होंने खुद को बेकसूर और सीबीआई की सर्च व पूछताछ से आहत बताया है। वहीं, सीबीआई ने इस आरोप को निराधार करार दिया है।

रिवाल्वर से कनपटी पर गोली मार ली
डीआईजी ध्रुवकांत ठाकुर ने बताया कि विकासनगर सेक्टर-6 के मकान नंबर 637 में रहने वाले 55 वर्षीय वर्मा ने सोमवार सुबह 8:30 बजे अपने लाइसेंसी रिवाल्वर से कनपटी पर गोली मार ली। फायर की आवाज पर उनकी पत्नी सरोजनी वर्मा और बेटा विकास कमरे में पहुंचे। फर्श पर खून से लथपथ पड़े वर्मा को अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। बाद में पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

वर्मा ने लिखा है सही काम कराया
पुलिस ने इंजीनियर सुनील वर्मा के कमरे से मिले रिवाल्वर और सुइसाइड नोट को कब्जे में ले लिया है। सुइसाइड नोट में वर्मा ने लिखा है कि उन्होंने सही काम कराया था। इसके बावजूद उन पर सीबीआई का शिकंजा कस रहा है। सीबीआई की छापेमारी और पूछताछ से आहत होकर उन्होंने खुदकुशी की है। उनके परिवार वालों को परेशान न किया जाए।

पहली एफआईआर में वर्मा भी आरोपी
पुलिस के मुताबिक एनआरएचएम घोटाले की पहली एफआईआर में वर्मा भी आरोपी थे। सीबीआई की टीम ने चार जनवरी को उनके घर पर तलाशी के साथ ही उनसे पूछताछ की थी। इसी घबराहट में उसकी तबीयत खराब हो गई और तीन दिन बाद रक्तचाप कम होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक सप्ताह तक चले इलाज के बाद डॉक्टरों ने छुट्टी दे दी थी। परिवार वालों का कहना है कि सोमवार सुबह वह कमरे में अकेले बैठे थे। थोड़ी देर बाद फायर की आवाज सुनाई दी।

अपग्रेडेशन का काम दो फर्मों को दिया गया
प्रदेश के 134 जिला अस्पतालों के अपग्रेडेशन के ठेके में जो मनमानी हुई, उसकी जांच में सुनील वर्मा भी फंसे थे। इन अस्पतालों के अपग्रेडेशन का काम दो फर्मों को दिया गया था। इसमें बड़ा ठेका मेसर्स सर्जिकॉन को दिया गया था। कुल 13.4 करोड़ के इस ठेके में 5.46 करोड़ का घपला सामने आया है। बड़े पैमाने पर हुए घपले में सीबीआई ने पहली बार दो जनवरी को पूर्व मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा समेत अन्य के खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज किए थे।

कुछ दस्तावेजों पर दस्तखत भी कराए
इसी सिलसिले में जब सीबीआई ने चार जनवरी को उत्तर प्रदेश समेत अन्य प्रांतों में साठ से अधिक जगहों पर एक साथ छापेमारी की थी तब वर्मा के यहां भी पड़ताल की गई थी। जानकार बताते हैं कि सीबीआई ने छापा मारने के बाद वर्र्मा से कुछ दस्तावेजों पर दस्तखत भी कराए थे। इसके बाद से ही वह डिप्रेशन में थे। वर्मा की खुदकुशी के बाद एनआरएचएम घोटाले में मृतकों की संख्या चार हो गई है और एक आरोपी जान देने का प्रयास कर चुका है।

वह सीबीआई की पूछताछ से घबराया
करोड़ों के घोटाले के चलते परिवार कल्याण विभाग के सीएमओ डॉ. वीपी सिंह व डॉ विनोद आर्य की हत्या फिर घोटाले के आरोपी डिप्टी सीएमओ डॉ वाईएस सचान की जेल में रहस्यमय हालात में हत्या और अब सुनील वर्मा ने खुद को गोली से उड़ा लिया है। इसके अलावा घोटाले का एक और आरोपी नमित टंडन पिछले दिनों ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी का प्रयास कर चुका है। वह सीबीआई की पूछताछ से घबराया था।

सीबीआई ने मांगा मौत का ब्योरा
अभियंता सुनील वर्मा द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में सीबीआई ने लखनऊ के डीआईजी से विस्तृत ब्योरा मांगा है। वर्मा को घोटाले में महत्वपूर्ण जानकारी रखने वाली एक अहम कड़ी माना जा रहा था। वर्मा पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और घोटाले से जुड़े अन्य बड़े लोगों के बीच की एक महत्वपूर्ण कड़ी थे। उससे पूछताछ में पांच हजार करोड़ से अधिक बड़े इस घोटाले के कई राज का पर्दाफाश होने की संभावना थी।

अब तक चार की जान गई
विनोद आर्य, सीएमओ
बीपी सिंह, सीएमओ
वाईएस सचान, डिप्टी सीएमओ
सुनील वर्मा, प्रोजेक्ट मैनेजर

दो मंत्रियों की छुट्टी
बाबू सिंह कुशवाहा
अनंत कुमार मिश्र

क्या थे आरोप
उत्तर प्रदेश में 13.4 करोड़ रुपये की लागत से 134 अस्पतालों के अपग्रेडेशन में हुए घोटाले से संबंधित एफआईआर में वर्मा का नाम था। सीबीआई के मुताबिक फर्जी दस्तावेज के आधार पर गाजियाबाद की एक फर्म को ठेका दिया गया था और इससे सरकारी खजाने को 5.46 करोड़ का नुकसान हुआ। चार जनवरी को वर्मा के ठिकाने पर छापे मारे गए थे।

क्या लिखा सुइसाइड नोट में
वर्मा ने लिखा है कि मैंने कोई गलती नहीं की। लेकिन जिस तरह से सीबीआई ने मेरे आवास पर छापेमारी की है उससे मैं दुखी हूं। इसी वजह से मैं अपनी जान दे रहा हूं।

सीबीआई ने क्या कहा
न तो वर्मा से कोई पूछताछ की गई है और न ही उनसे पूछताछ के लिए सीबीआई के समक्ष पेश होने को कहा गया था।

यह सब राजनीतिक साजिश है। एनआरएचएम स्वतंत्र निकाय है। अगर उसमें कुछ गलत हो रहा था तो केंद्र सरकार पैसे क्यों भेज रही थी। इस मामले में केंद्र के अधिकारी ही असली दोषी हैं।
मायावती

सीबीआई ने छोटे गुनहगारों के खिलाफ ही कार्रवाई की है। बडे़ सूत्रधार के खिलाफ कुछ नहीं किया गया है। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बडे़ सूत्रधारों को कौन बचा रहा है।
रविशंकर प्रसाद, भाजपा नेता
.......................................................................

एनआरएचएम घोटाला: दिल्ली में रची गई थी साजिश

Jan 23, 10:52 pm
नई दिल्ली [नीलू रंजन]। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन [एनआरएचएम] में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले की साजिश नई दिल्ली स्थित उत्तर प्रदेश भवन में रची गई थी। राज्य के अधिकारी और सप्लायर दोनों ही यूपी भवन में बैठकर रिश्वत के लिए लेन-देन तय करते थे। अब सीबीआइ अधिकारी यूपी भवन में पिछले पांच साल के दौरान रुकने वाले अधिकारियों और उनसे मिलने वालों का पता लगाने में जुटी है। इसके लिए यूपी भवन की व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
सीबीआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यूपी भवन के पिछले पांच साल के विजिटर रजिस्टर [आगंतुक पुस्तिका] जांच एजेंसी ने अपने कब्जे में ले लीं हैं। इसके सहारे यह पता लगाया जा रहा है कि इन सालों में उत्तार प्रदेश का कौन-कौन अधिकारी यूपी भवन में आकर ठहरा था और उनसे मिलने के लिए कौन-कौन से लोग आते थे।
आगंतुक रजिस्टर में विस्तृत विवरण दर्ज किया जाता है। इसमें आगंतुक के नाम पते के साथ यह भी दर्ज होता है कि वह कितनी देर तक भवन में रुका। जाहिर है घोटाले की साजिश का पर्दाफाश करने में आगंतुक रजिस्टर अहम कड़ी साबित हो सकता है।
आगंतुक रजिस्टर को कब्जे में लेने के साथ ही सीबीआइ ने सोमवार को यूपी भवन के पांच कर्मचारियों को पूछताछ के लिए तलब किया है। इनमें यूपी भवन का व्यवस्था अधिकारी संजय चौधरी, प्रबंधक गोविंद राम और रिसेप्शन पर बैठने वाले रामबहल, पारसनाथ एवं राकेश शामिल हैं।
जांच से जुड़े के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन कर्मचारियों से रजिस्टर में दर्ज आगंतुकों के हुलिए और व्यवहार के बारे में पूछताछ की जा रही है। आगंतुक पुस्तिका और भवन के कर्मचारियों के बयान आरोपियों की आपसी मिलीभगत और घोटाले की साबित करने में अहम सुबूत बन सकते हैं।

बिना अनुमति के कई बार विदेश गए प्रदीप शुक्ला

Jan 22, 11:10 pm
लखनऊ [आनन्द राय]। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन [एनआरएचएम] घोटाले से सुर्खियों में आए परिवार कल्याण विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव प्रदीप शुक्ला बिना सरकारी अनुमति के एक दर्जन से अधिक बार विदेश यात्रा कर चुके हैं। यह जानकारी मिलने के बाद सीबीआइ का अनुमान है कि शुक्ला ने विदेश यात्रा केदौरान लगभग पचास लाख रुपये खर्च किए। ऐसे में सीबीआइ को हैरानी हो रही है कि उनके खिलाफ सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की।
प्रावधान के मुताबिक नियुक्ति विभाग से बिना अनुमति के विदेश जाने वाले आइएएस अधिकारियों के खिलाफ सरकार कार्रवाई करती है। प्रदीप शुक्ला तो एक-दो नहीं दर्जन बार बिना अनुमति के विदेश भ्रमण पर गए। सीबीआइ उन कारणों को तलाश रही है, जिनके चलते शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। अभी तक उनसे जांच एजेंसी ने पूछताछ नहीं की है। लेकिन शायद इस बात से अवगत हो चुकी है कि शुक्ला ने किस तरह राजधानी के एक एजेंट के जरिए टिकट मंगवाए और उनका खर्च वहन करने में किन लोगों ने अहम भूमिका निभाई।
सूत्रों की मानें तो प्रदीप शुक्ला ने पिछले तीन वर्षो में एक दर्जन से अधिक बार अमेरिका, यूरोप और सिंगापुर की यात्रा की। उन्होंने विदेश यात्रा के दौरान हवाई टिकट पर 33 लाख रुपये, घरेलू उड़ान पर 12 लाख रुपये और होटल व अन्य मदों में पांच लाख रुपये खर्च किए। ऐसे में सीबीआइ उस एजेंट से भी पूछताछ करने की तैयारी कर रही है, जिन्होंने प्रदीप शुक्ला को विदेश जाने के लिए टिकट मुहैया कराए। सीबीआइ को पता है कि टिकट का खर्च वहन करने में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कुछ ठेकेदार सीधे प्रदीप शुक्ला को नकद रकम मुहैया कराते थे। ऐसी स्थिति में प्रदीप शुक्ल के उपलब्ध न होने की वजह से अभी तक उनका पक्ष नहीं जाना जा सका है।

इनका क्या कसूर है ?

इनका क्या कसूर है जब ये सत्ता के सिपाही हैं तो चुनाव आयोग को पहले ही इन्हें हटा देना था.

जल्द गिर सकती है कई अफसरों पर गाज

नई दिल्ली/लखनऊ/अमर उजाला ब्यूरो।
Story Update : Tuesday, January 24, 2012    4:29 AM
May soon fall victim to several officers
मुख्य सचिव अनूप मिश्रा, प्रमुख सचिव नियुक्ति कुंवर फतेह बहादुर, डीजी पीएसी बृजलाल समेत आधा दर्जन से ज्यादा आला अफसरों और दो दर्जन से ज्यादा डीएम व पुलिस कप्तानों के साथ-साथ अब छोटे अफसर भी चुनाव आयोग के सर्विलांस पर हैं। रिटर्निंग आफिसर (आरओ), सहायक रिटर्निंग आफिसर (एआरओ) व चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभागों के अधिकारियों के कार्यकलापों पर भी आयोग नजर रखे हुए है।

चुनाव प्रक्रिया से सीधे जुड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के अलावा विभागीय अधिकारियों की गतिविधियों की मॉनीटरिंग शुरू करा दी गई है। अगर कहीं से किसी अधिकारी के खिलाफ पक्षपातपूर्ण ढंग से काम करने की शिकायत मिलती है तो उसकी गोपनीय जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, पता चला है कि दिल्ली में अनूप मिश्रा, कुंवर फतेह बहादुर, नवनीत सहगल, बृजलाल सहित कई जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों को हटाने पर सहमति बन चुकी है। जल्द ही आदेश जारी हो सकते हैं।

दिल्ली में चुनाव आयोग ने दो दिन तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा के साथ बैठक करके न सिर्फ चुनावी तैयारियों की गहन समीक्षा की बल्कि उन अफसरों केबारे में भी तफसील से फीडबैक लिया गया जिन पर उंगलियां उठ रही हैं। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि आयोग को कुछ विभागीय अधिकारियों के बारे में रिपोर्ट मिली है कि वे दल विशेष के पक्ष में काम कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।

सूत्रों का कहना है कि आरओ और एआरओ के अलावा चुनाव में अहम भूमिका निभाने वाले खाद्य एवं रसद, परिवहन, राजस्व, शिक्षा सहित अन्य विभागों के निचले स्तर के अधिकारियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। अगर कहीं से किसी के खिलाफ शिकायत मिलती है तो उसकी गोपनीय जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि आयोग ने शासन केआला अधिकारियों के अलावा उन जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों के बारे में भी अपने स्रोतों से सूचनाएं एकत्र कराई हैं जिनके बारे में शिकायतें मिली हैं या जिनका आचरण संदिग्ध है। सूत्रों का कहना है कि आयोग एक-दो दिन के भीतर ही इन अफसरों को हटाने का फरमान जारी कर सकता है।