कई नौकरशाह कर रहे हैं बसपा के प्रवक्ता की तरह कामः कांग्रेस | |||
| नई दिल्ली। | |||
| Story Update : Monday, January 16, 2012 11:06 PM | |||
कांग्रेस ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के विवादित प्रमुख सचिव शशांक शेखर सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने की मांग की है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग को प्रदेश के कई आला अधिकारियों की सूची देते हुए आरोप लगाया है कि ये अधिकारी बसपा के प्रवक्ता की तरह काम कर रहे हैं। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक इस सूची में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट सचिव शशांक शेखर और आला अधिकारी फतेह बहादुर सिंह का नाम सबसे ऊपर है। उत्तर प्रदेश के प्रभारी कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने तीन से चार शीर्ष अधिकारियों समेत कई निचले स्तर के अधिकारियों को हटाने की मांग की गई है। कैबिनेट सचिव शशांक शेखर समेत कई आला अधिकारियों को हटाने की मांग कर कांग्रेस ने सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। अपने बर्थ डे के मौके पर मायावती ने जिस तरह कांग्रेस को प्रमुख तौर पर निशाने पर लिया था। उसके एक दिन बाद ही कांग्रेस ने भी इस तरह से कड़ा जवाब देकर सूबे की चुनावी जंग को बसपा बनाम कांग्रेस की लड़ाई में बदलने की कोशिश की है। सूबे में अभी तक किसी दूसरी पार्टी ने सीधे अफसरों पर निशाना साधते हुए चुनाव आयोग से शिकायत नहीं की है। इसलिए भी पार्टी के रणनीतिकार कह रहे है कि इस मामले में पार्टी ने राजनीतिक बढ़त हासिल कर ली है। चुनाव आयोग में शिकायत करने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण सरकारी अंग चुनाव के लिए बसपा के प्रवक्ता बन गए हैं। वह सरकारी ओहदे पर होकर बसपा के लिए काम कर रहे है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि बेशक फतेह बहादुर सिंह को चुनाव आयोग के आदेश पर हटा दिया गया है लेकिन अभी भी वह सरकार के अंदर पैठ रख कर बसपा को कथित तौर पर फायदा पहुंचा रहे है। प्रतिनिधिमंडल में दिग्विजय सिंह के अलावा कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी, राष्ट्रीय सचिव परवेज हाशमी, प्रमोद तिवारी और राजेश पति त्रिपाठी शामिल थे। |
मायावती ने प्रधानमंत्री को लोकपाल के अधीन करने की मांग की.
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री एवं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस करके साफ़ कर दिया कि वह प्रधानमंत्री, निचले स्तर के कर्मचारियों और सीबीआई को लोकपाल के अधीन रखने के पक्ष में हैं.
मुख्यमंत्री मायावती और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य स्वयं भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे हैं. लेकिन प्रेस कांफ्रेंस में मायावती ने भ्रष्टाचार और राजनीति के अपराधीकरण पर गंभीर चिंता प्रकट की.
मायावती ने कहा कि उत्तर प्रदेश भी भ्रष्टाचार से अछूता नहीं है, लेकिन उनके अनुसार इसके लिए पूर्ववर्ती सरकारें और दूसरे दलों से बीएसपी में आए लोग जिम्मेदार हैं.
"खासतौर से इस किस्म के लोग जो दूसरी पार्टियों को छोड़कर बीएसपी पार्टी से जुड़ने के बाद सांसद, विधायक और सरकार बनने पर मंत्री आदि बन गए हैं उन्होंने बीएसपी में आने के बावजूद गलत कार्य करना नही छोड़ा है तो उन्हें भी उनकी सरकार ने प्रदेश और जनहित में बिना हिचक जेल की सलाखों के पीछे भेजा है और कार्रवाही की है."
मायावती
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार तथा राजनीति में अपराधीकरण को समाप्त करने के लिए उनकी सरकार को काफी मेहनत करनी पड रही है.
मायावती ने कहा, “खासतौर से इस किस्म के लोग जो दूसरी पार्टियों को छोड़कर बीएसपी पार्टी से जुड़ने के बाद सांसद, विधायक और सरकार बनने पर मंत्री आदि बन गए हैं उन्होंने बीएसपी में आने के बावजूद गलत कार्य करना नही छोड़ा है तो उन्हें भी उनकी सरकार ने प्रदेश और जनहित में बिना हिचक जेल की सलाखों के पीछे भेजा है और कार्रवाही की है.”
कांग्रेस पर हमला
मायावती ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्यवाही के लिए मजबूत तंत्र नही बनने देना चाहती , क्योंकि उनके मंत्री भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं.
मायावती ने कहा कि संसद की स्थायी समिति द्वारा लोक पाल विधेयक का जो मसौदा पेश किया है वह भ्रष्टाचार को खत्म नही कर सकेगा. उन्होंने सुझाव दिया कि चपरासी से लेकर प्रधानमन्त्री तक सभी को लोकपाल के दायरे में रखना चाहिए.
मायावती ने सीबीआई को लोकपाल के नियंत्रण में लाने पर जोर देते हुए कहा कि इससे समय-समय पर केंद्र सरकारों द्वारा किये जा रहें इसके दुरूपयोग को कुछ हद तक समाप्त किया जा सकेगा.
इसके साथ ही मायावती ने इस बात पर भी जोर दिया कि लोकपाल विधेयक को तैयार करने में संविधान का पालन किया जाए और दलित तथा अन्य पिछड़े वर्गों को आरक्षण दिया जाए.
मायावती ने एक और बात ये कही कि लोकपाल विधेयक में संविधान के संघीय ढाँचे का ध्यान जरुर रखा जाए.
लोकायुक्त पर चुप्पी
"सुश्री मायावती और बसपा सरकार प्रदेश में घोर भ्रष्टाचार और राजनीतिक अपराधीकरण के लिए स्वयं पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं."
रीता जोशी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
लेकिन मायावती ने राज्यों में लोकपाल के अधिकारों पर कोई बात नही की. याद दिला दें कि उत्तर प्रदेश में लोकायुक्त बराबर ये मांग करते रहें हैं कि मुख्यमंत्री को भी उनके अधिकार क्षेत्र में रखा जाए, लेकिन मायावती ने उस पर ध्यान नही दिया.
मायावती ने प्रेस कांफ्रेंस करके यह जता दिया कि बहुजन समाज पार्टी केंद्र की कांग्रेस सरकार को भले ही बाहर से समर्थन दे रही हो पर लोकपाल के मुद्दे पर वह अन्ना हजारे और अन्य विपक्षी दलों के करीब है.
लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता जोशी ने मायावती के बयान पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि, “सुश्री मायावती और बसपा सरकार प्रदेश में घोर भ्रष्टाचार और राजनीतिक अपराधीकरण के लिए स्वयं पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं.”
डा. जोशी ने मुख्यमंत्री के बयान को गुमराह करने वाला बताया है.
भारतीय जनता पार्टी ने अपनी प्रतिक्रिया में मायावती को 'देश की सबसे भ्रष्ट व झूठ बोलने में माहिर मुख्यमंत्री बताया'.
पार्टी प्रवक्ता हरद्वार दुबे ने आज पार्टी मुख्यालय पर संवाददाताओं से बात करते हुए मायावती द्वारा कालेधन के मामले में कांग्रेस से भाजपा की मिलीभगत के आरोप को ऐतिहासिक झूठ करार दिया है.
दुबे ने कहा कि मायावती के मुंह से भ्रष्टाचार पर बोलना शोभा नहीं देता. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी का इस शर्त पर समर्थन किया था कि पहले कांग्रेस राज्यपाल के यहां ताज काडिडोर मामले की जांच को खारिज कराए.
दुबे ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी ने पहले उनकी मांग को माना तथा तत्कालीन उत्तर प्रदेश के राज्यपाल ने आकण्ठ भ्रष्टाचार में फंसी मायावती के मामले को समाप्त किया.
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दूसरी ओर-
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शहरी निकायों के चुनाव पर मायावती सरकार की आनाकानी
बुधवार, 14 दिसंबर, 2011 को 18:29 IST तक के समाचार