शनिवार, 27 अगस्त 2011

माया पलटीं, कहा जनलोकपाल के साथ नहीं

(अमर उजाला से साभार)

माया पलटीं, कहा जनलोकपाल के साथ नहीं

लखनऊ।
Story Update : Saturday, August 27, 2011    12:28 AM
अन्ना के आंदोलन का समर्थन करने का ऐलान कर चुकीं बसपा सुप्रीमो और मुख्यमंत्री मायावती शुक्रवार को पलट गईं। शुक्रवार को आननफानन बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री ने साफ कि या कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ तो हैं पर अन्ना के जन लोकपाल बिल के साथ नहीं। पूरे मामले पर तीखे तेवर अपनाते हुए उन्होंने अन्ना हजारे को अगला लोकसभा चुनाव लड़ अपनी मर्जी का लोकपाल बिल पास कराने की सलाह दे दी।

केवल बड़े अफसरों को ही शामिल करना चाहिए
शुक्रवार को मायावती ने केंद्र सरकार से कहा है कि लोकपाल संस्था में अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यकों को डॉ. अंबेडकर की मंशा के अनुरूप प्रतिनिधित्व दे। यही नहीं बिल की मसौदा कमेटी में भी दलितों और सभी धर्मों के लोगों को प्रतिनिधित्व देने का मसला उन्होंने उठाया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इसके बिना वह संसद में लाए गए लोकपाल बिल को समर्थन नहीं देगी। उन्होंने कहा कि नया लोकपाल बिल संविधान के दायरे में ही बनना चाहिए और लोकपाल संस्था के दायरे में इसमें केवल बड़े अफसरों को ही शामिल करना चाहिए।

अन्ना का अनशन खत्म कराया जाना चाहिए
यही नहीं मायावती ने केंद्र सरकार को आगाह किया है कि कुछ जातिवादी और सांप्रदायिक ताकतें देश के संविधान को बदलने की कोशिश में अंदर ही अंदर कुछ कर रही हैं। मायावती ने कहा कि अन्ना हजारे की टीम को चाहिए कि वह अब आंदोलन करने के बजाए 2014 के लोकसभा चुनाव में उतरें और अपनी सरकार बना कर अपनी मर्जी का लोकपाल बिल पास कराएं। मायावती ने कहा अन्ना हजारे के आंदोलन की आड़ में एनडीए व यूपीए बीच जो चूहे-बिल्ली का खेल चल रहा है वह अब बंद होना चाहिए और अन्ना का अनशन खत्म कराया जाना चाहिए।

जनलोकपाल बिल पर जाहिर की राय
मायावती ने कहा कि लोकपाल के दायरे में प्रधानमंत्री और न्यायपालिका का लाने का सवाल है तो जो निर्णय आम सहमति से होगा बसपा उसका समर्थन करेगी। मायावती ने कहा लोकपाल बिल में संपूर्ण सरकारी तंत्र को लाने की बात है तो उच्च पदों पर बैठे लोगों को ही इसके दायरे में लाया जाना ठीक है। ऊंचे पदों पर बैठे लोग यदि भ्रष्टाचार से मुक्त होंगे तो वे निचले स्तर पर पर भ्रष्टाचार पर रोक लगा सकेंगे, जहां तक राज्यों में लोकायुक्त बनाने की बात है तो यह राज्यों का अधिकार है। यूपी में लोकायुक्त संस्था काफी प्रभावी है और उसकी सिफारिशों पर सरकार ने अमल भी किया है। लोकपाल बिल में सिटीजन चार्टर की बात कही गई है प्रदेश सरकार ने तो पहले से ही जनहित गारंटी अधिनियम के जरिए इसे लागू किया जा चुका है।

अन्ना के आंदोलन पर चिंता
मायावती ने कहा कि अन्ना के आंदोलन के दौरान रामलीला मैदान में कुछ असामाजिक तत्वों की उपस्थिति पाई गई है, गृह मंत्रालय उस पर सख्ती से निपटे। उत्तर प्रदेश में अन्ना समर्थक अभी तक शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं पर उनको वह एडवांस में आगाह करती हैं। यदि उन्होंने कानून हाथ में लिया तो फिर उन सख्त क ार्रवाई की जाएगी।
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मायावती ने की अन्ना की तरफदारी

लखनऊ।
Story Update : Wednesday, August 17, 2011    4:49 PM
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने भ्रष्टाचार के खिलाफ समाजसेवी अन्ना हजारे के आन्दोलन को पूरा समर्थन देते हुए केन्द्र सरकार और सिविल सोसायटी को आम सहमति बनाने का सुझाव दिया है ताकि एक बेहतरीन कानून बनाया जा सके।

मायावती ने कहा कि वह खुद और बहुजन समाज पार्टी शुरू से ही भ्रष्टाचार और राजनीति में अपराधीकरण के खिलाफ रही है। उन्होंने कहा कि वह और उनकी पार्टी अन्ना के भ्रष्टाचार के खिलाफ आन्दोलन का समर्थन करती है। केन्द्र सरकार की ओर से संसद में पेश लोकपाल विधेयक को लेकर उत्पन्न मतभेद को दूर करने के लिए दोनों पक्षों को मिलकर आपसी सहमति बनानी चाहिए ताकि एक बेहतरीन कानून बने और भ्रष्टाचार को रोका जा सके।

उन्होंने अन्ना की गिरफ्तारी की निंदा की और कहा कि उन्हें जिस तरह पुलिस ने गिरफ्तार किया वह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। बसपा सिर्फ अन्ना ही नहीं बल्कि उन सभी संगठनों का स्वागत करती है और अपना समर्थन देती है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। मायावती ने कहा कि बसपा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ चलने वाले हर मुहिम का समर्थन किया है। पार्टी के प्रमुख नारों में यह शामिल रहा है।

उन्होंने कहा कि पार्टी शुरू से ही मुख्य रूप से भ्रष्टाचारमुक्त, अन्यायमुक्त और विकासयुक्त आधार पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 2007 के विधानसभा चुनाव में पार्टी का यह मुख्य नारा था। उनका कहना था कि उनकी सरकार भ्रष्टाचार के हमेशा खिलाफ रही है। भ्रष्टाचारियों से कभी कोई समझौता नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और अपराधीकरण के मामले में पार्टी के सांसदों, मंत्रियों और विधायकों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। मायावती ने कुछ महीने पहले अन्ना को सुझाव दिया था कि वह जनता के बीच जाएं और अपील करें कि लोकसभा के चुनाव में उनके जन लोकपाल विधेयक को समर्थन देने वाले प्रत्याशियों को जिताएं।
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अन्ना ने मायावती से मिलने का मांगा समय

लखनऊ।
Story Update : Saturday, July 02, 2011    12:29 PM
प्रख्यात समाजसेवी अन्ना हजारे ने जन लोकपाल विधेयक पर बातचीत के लिए उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती से मिलने का समय मांगा है। मायावती से मिलकर अन्ना हजारे जन लोकपाल विधेयक पर आम सहमति बनाने के लिए बातचीत करना चाहते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने उन्हें अभी मिलने का समय दिया है या नहीं इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है।

बिल का मौजूदा स्वरूप में पारित होना मुश्किल
सूत्रों के मुताबिक हजारे ‌रविवार सुबह तक मायावती से मिलना चाहते हैं, क्योंकि इस मुद्दे पर 3 जुलाई को केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई है। जन लोकपाल विधेयक पर मायावती अपना मत पहले ही स्पष्ट कर चुकी हैं। हाल ही में बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा था कि केंद्र की वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हजारे के मन मुताबिक लोकपाल विधेयक पारित होना नामुमकिन है।

सांसदों को जितवाने का प्रयास करें
इसलिए हजारे के नेतृत्व वाली सिविल सोसायटी को इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाना चाहिए। 2014 में प्रस्तावित लोकसभा चुनाव में ऐसे सांसदों को जितवाने का प्रयास करना चाहिए जो जन लोकपाल विधेयक के समर्थक हों और इसे संसद में पारित करवा सकें।

अन्य दलों के नेताओं से भी मिले
हजारे इस मसले पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से मिल चुके हैं और आज उनका कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने का है।

बुधवार, 24 अगस्त 2011

भ्रष्टाचार के महानायक-अमर सिंह के ख़िलाफ़ चार्ज़शीट !

क्या सचमुच 'अमर सिंह' पर मुक़दमा चलेगा !
डॉ.लाल रत्नाकर 
(नीचे की बी बी सी की खबर से यही लगता है की)  



कभी समाजवादी पार्टी में रहे अमर सिंह ने अब अपनी नई पार्टी बनाई है.
संसद में रिश्वत लेकर वोट देने के मामले में राजनीतिज्ञ अमर सिंह के ख़िलाफ़ चार्जशीट दाखिल की गई है.
अमर सिंह पूर्व में समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं लेकिन अब उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली है. उनके ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए हैं.
यह मामला 2008 का है जब बीजेपी के कुछ सांसद संसद में वोटिंग के दौरान सूटकेसों में पैसा भरकर ले गए थे और उन्होंने आरोप लगाया था कि उन्हें सरकार के हक में वोट देने के लिए पैसा दिया गया गया था.
इन सांसदों में से एक अशोक अर्गल के ख़िलाफ़ मामला चलेगा जबकि बाकी दोनों सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोड़ा पर पहले ही घूस लेने का मामला चल रहा है.
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के तत्कालीन सलाहकार सुधींद्र कुलकर्णी पर भी आरोप है कि उन्होंने इस पूरे अभियान की योजना बनाई ताकि यूपीए सरकार की रिश्वत देने की मंशा का पर्दाफाश किया जा सके.
कुलकर्णी पर भी आपराधिक मामला चल सकता है जिसमें रिश्वत का प्रस्ताव देने का आरोप लगाया जा सकता है.
सन् 2008 में परमाणु सौदे के मुद्दे पर वोटिंग हुई थी. यूपीए सरकार को वोटिंग में बहुमत मिला लेकिन रिश्वत देकर वोट खरीदने का मामला बहुत विवादित रहा.
बीजेपी का कहना है कि यूपीए ने तीन भाजपा सांसदों अशोक अर्गल, फग्गन सिंह कुलस्ते और महावीर भगोड़ा को रिश्वत की पेशकश की गई थी और वो यही पैसा लेकर संसद में पहुंचे थे ताकि वो अपनी बात संसद के सामने रख सकें.
इस मामले में एक टीवी चैनल की निष्पक्षता भी संदेह के घेरे में आई थी जिसके साथ मिलकर रिश्वत के लेन देन की प्रक्रिया का एक स्टिंग आपरेशन भी किया गया था.
बाद में बीजेपी सांसद कुलस्ते और भगोड़ा पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया और आरोपपत्र दायर किया गया जबकि पुलिस ने अर्गल के ख़िलाफ़ आरोपपत्र दायर करने के लिए लोकसभा स्पीकर से अनुमति मांगी है क्योंकि अर्गल अभी भी सांसद हैं.

मंगलवार, 16 अगस्त 2011

प्रत्याशी बेचैन

जब राजनीतिक पार्टीयाँ इस मुकाम पर पहुँच गए हों की अपने कार्यकर्ताओं पर विश्वास न हो तब क्या हश्र होगा पार्टियों का.
बसपा उलटफेर की रणनीति से प्रत्याशी बेचैन
Story Update : Monday, August 15, 2011     2:11 AM
पहले चरण की समीक्षा में फेल प्रत्याशियों का बदलना तय
प्रत्याशी अब पदाधिकारियों का विश्वास जीतने में जुट गए
नए प्रत्याशियों की घोषणा होगी हजारों की भीड़ के बीच
वाराणसी। विधानसभा चुनाव 2012 की मुहिम में जुटीं बसपा सुप्रीमो द्वारा कई प्रत्याशियों के बदले जाने के बाद प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है। प्रत्याशी अब खुद को और सुरक्षित करने में जुट गए हैं। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों को विश्वास में लेने और लगातार चरचाओं में बने रहने की कोशिश प्रत्याशी करने लगे हैं। पार्टी रणनीति के मुताबिक जो प्रत्याशी चुनाव खड़ा करता नजर नहीं आएगा उसके स्थान पर दूसरे को मौका मिलना तय है।
जिले में एक साथ तीन प्रत्याशियों के बदले जाने से राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। इस बदलाव से दूसरे दलों में भी प्रत्याशियों के बदलने की प्राथमिकता बदलने के आसार हैं। पिंडरा में दूसरे दल अब पटेल प्रत्याशी पर दांव लगाने की सोच सकेंगे। दक्षिणी से बसपा ने इस बदलाव से अंसारी बिरादरी को प्रभावित करने का प्रयास किया है। सेवापुरी में पार्टी ने इस बदलाव में फिर से भूमिहार बिरादरी पर ही दांव लगाया है। बदलाव के बाद नये प्रत्याशियों की घोषणा भी धमाकेदार अंदाज में करने की रणनीति बनी है। तीनों विधानसभा क्षेत्रों में 16 अगस्त को अलग अलग सभाएं कर नये नामों की घोषणा होगी। नये प्रत्याशियों पर भारी भीड़ जुटाने का दबाव है। इस कार्यक्रम में पदाधिकारी अभी से लगा दिए गए हैं।
जिस तरीके से पार्टी प्रत्याशियों के प्रयास और क्षेत्र में उनकी छवि की समीक्षा कर रही है आने वाले दिनों में पूर्वांचल से कुछ और प्रत्याशी भी बदले जा सकते हैं। कुछ प्रत्याशियों के नामों पर चरचा चलने लगी है। दूसरी तरफ विधायक सुशील सिंह को फिर से टिकट दिए जाने के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि उनके अंदर फिर से सीट निकालने का माद्दा है। उनके चुनाव लड़ने से पूर्वांचल में क्षत्रिय समाज के लोग पार्टी से जुड़े रहेंगे। सुशील को पूर्वांचल में क्षत्रियों को जोड़ने की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।

बुधवार, 10 अगस्त 2011

बंगले को करोड़ों की दरकार


मायावती
उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री मायावती को भूतपूर्व मुख्यमंत्री के तौर पर मिले सरकारी बंगले में निर्माण के लिए विधानसभा से 22 करोड़ से भी अधिक की अतिरिक्त धनराशि की मांग की है.
यह मांग मंगलवार को विधान सभा में वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए पेश अनुपूरक बजट में की गई है. सरकार ने 108 अरब से अधिक रुपयों के लिए अनुपूरक बजट पेश किया है.
मायावती को मॉल एवेन्यू इलाक़े का यह बंगला वर्ष 1995 से आबंटित है, जब वे पहली बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी थी.
मायावती जितनी बार मुख्यमंत्री बनीं, उतनी बार 13, मॉल एवेन्यू बंगले में नया निर्माण और विस्तार होता गया और बंगले की चारदीवारी ऊँची होती गई.
इस समय बंगले की चारदीवारी लाल क़िले से भी ऊँची है. इसी बंगले के सामने दो-तीन पुराने बंगलों को तोड़कर बहुजन समाज पार्टी का कार्यालय भी बनाया गया है.

साज-सज्जा

इस बार वर्ष 2007 में सरकार बनते ही बगल का गन्ना आयुक्त कार्यालय और पीछे का एक बंगला भी ख़ाली कराकर 13, मॉल एवेन्यू में मिला लिया गया.
निर्माण में लगे कर्मचारी बताते रहते हैं कि किस तरह मायावती नए कमरे, किचेन, बाथरूम और तहखाना वगैरह बनवाती हैं और फिर उन्हें तोडकर नए सिरे से बनवाती हैं.
बंगले की साज-सज्जा में भी महंगे सामान और उपकरण लगते हैं और फिर बदले जाते हैं.
अनुपूरक अनुदान के पेज नंबर 122 में लिखा गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने मायावती के बंगले के लिए इस वर्ष आकस्मि निधि से उधार लेकर 20 करोड़ रूपए से अधिक ख़र्च कर दिए हैं.

अब आकस्मि निधि में यह धन वापस करने के लिए सरकार विधान सभा से मोहर लगवाना चाहती है. यह भी कहा गया कि इस बंगले में विभिन्न कार्यों के लिए दो करोड़ 37 लाख रुपयों की और आवश्यकता है.

विपक्ष के नेता शिवपाल सिंह यादव का कहना है कि अब तक इस बंगले पर 150 करोड़ रूपए ख़र्च हो चुके हैं.
इसके अलावा अनुपूरक बजट में मुख्यमंत्री की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त कारें और सिग्नल जैमर ख़रीदने के लिए भी 26 करोड़ रुपयों की मांग की गई है.

सुरक्षा

मायावती अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित रहती हैं. उन्होंने सचिवालय एनेक्सी मुख्यमंत्री कार्यालय में जाने के लिए पीछे से एक अलग रास्ता बनवाया है. जब वह शहर में निकलती हैं बड़ी तादाद में पुलिस तैनात होती है.
उनके साथ क़रीब दो दर्जन गाड़ियां और एम्बुलेंस वगैरह चलती है. मायावती के प्रिय स्मारकों के निर्माण और रख-रखाव के लिए भी और धनराशि की मांग अनुपूरक बजट में की गई है.
इनमें गोमती तट पर निर्माणाधीन 32 करोड रूपए और कांशीराम इको गार्डन के लिए अतिरिक्त 41 करोड़ रूपए की मांग की गई है. याद दिला दें कि मायावती के प्रिय स्मारकों और मूर्तियों आदि पर कई हज़ार करोड़ रूपए ख़र्च हो चुके हैं. इन स्मारकों के 161 करोड़ रुपयों के कार्पस की व्यवस्था पहले से है.
विधान सभा में नेता विरोधी दल शिवपाल सिंह यादव और कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने इन सब कार्यों को फ़िजूलख़र्ची और जनता के पैसे का दुरूपयोग बताया है.
लेकिन सबको मालूम है कि मायावती विपक्ष की आलोचनाओं की परवाह नही करती.
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बहन मायावती ज़ी उत्तर प्रदेश की शासिका हैं उनके आवास पर क्या खर्च हो रहा है यह खबर तो होनी ही नहीं चाहिए, सोनिया के इलाज पर कितना खर्च हो रहा है इसपर रामदत्त ज़ी को याद नहीं आता है. लेकिन उन्हें बहन ज़ी का दो चार हज़ार करोड़ क्या होता है पर नज़र नहीं डालनी चाहिए, करोड़ों अरबों की संपत्ति से जब सवर्ण अपने महल बना रहा था या होता है तो किसी का ध्यान नहीं जाता है. लोक तंत्र में दलितों की ही संपत्ति दिखाई देती है. 
जब भाई जी कहीं से भी ईमानदार नहीं हैं, बहन मायावती से उनका स्नेह है या पूर्वजन्म का कोई ताल्लुक क्योंकि जैसे ही भाई शिवपाल मुहं खोलते हैं वैसे ही यह मान लिया जाता है की यह जरूर ईर्ष्यावश कह रहे हैं या कह रहे होंगें. यदि यही बात कोई अन्य व्यक्ति कहता जो भाई शिवपाल ज़ी की छवि से मेल नहीं खाता तो एक बड़ी खबर होती.  
    (यद्यपि श्री शिवपाल यादव यह कहने का हक नहीं रखते की मायावती जी या मायावती के आवास पर कितना खर्च हो रहा है.यह बात यहीं पर ख़तम नहीं होती बल्कि कई सवाल अनुतारित्त रह जाते हैं क्योंकि भाई शिवपाल नैतिक रूप से इमानदार नहीं हैं)
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    साभार बी बी सी से

रविवार, 7 अगस्त 2011

रेल टिकट आरक्षण में 'घोटाला'



भारतीय रेलवे
महालेखाकार ने आम रेलवे यात्रियों के अंदेशों की पुष्टि कर दी है
भारत के नियंत्रक और महालेखाकार ने शुक्रवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रेलवे कर्मचारियों और दलालों का गठजोड़ तत्काल कोटे में मिलने वाली टिकटों में भारी धांधली करता है.
महालेखाकार ने भारतीय रेलवे की कंप्यूटराइज्ड तत्काल और अग्रिम आरक्षण सुविधा की जाँच करने पर पाया कि जिन आम ज़रूरतमंद यात्रियों की सुविधा के लिए यह सेवा बनी है वो इस घोटालेबाज़ी के कारण इसका पूरा लाभ नहीं ले पाते.
उल्लेखनीय है कि रेलवे की इंटरनेट आरक्षण सुविधा के ज़रिए हर दिन लाखों टिकटें बुक होती हैं.
यात्री हमेशा टिकटें न मिलने की शिकायत करते हैं जबकि रेलवे के अधिकारी कहते रहे हैं कि इंटरनेट पर आरक्षण सुविधा पारदर्शी है.

शिकायत पर मुहर

जांच में पाया गया कि टिकट खिड़की खुलने के चंद ही मिनटों में तत्काल कोटे की सभी टिकटें खत्म हो जाती हैं
महालेखाकार की रिपोर्ट
महालेखाकार ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है," जांच में पाया गया कि टिकट खिड़की खुलने के चंद ही मिनटों में तत्काल कोटे की सभी टिकटें खत्म हो जाती हैं."
भारतीय ट्रेनों में यात्रा करने वाले आम यात्री लम्बे समय से रेलवे कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत की शिकायत कर रहे हैं लेकिन यह पहली बार हुआ है कि किसी गंभीर राष्ट्रीय एजेंसी ने इस शिकायत पर मुहर लगाई है.
अपनी जांच में महालेखाकार ने पाया कि ठीक सुबह आठ बजे जब तत्काल टिकट की बुकिंग कंप्यूटर पर खुलती है तभी बुकिंग कंप्यूटर हैंग हो जाते हैं. जब तक यात्री लॉगइन करता है तब तक सभी टिकटें ख़त्म हो जाती हैं.
रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है,"चार पांच मिनट में ही तत्काल कोटे की सभी टिकटें ख़त्म हो जाती हैं."
पहले भारतीय रेल में तत्काल कोटे की टिकट का आरक्षण यात्रा का दिन छोड़ कर पांच दिन पहले शुरू होता था जो बाद में घटा कर दो दिन कर दिया गया.
तत्काल कोटे की टिकटें इंटरनेट पर सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक बुक की जा सकती हैं.
अवकाश वाले दिनों में यह सुविधा केवल सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक ही उपलब्ध होती है.
(साभार बीबीसी हिंदी)

'यूपी में स्मारकों पर अतिरिक्त ख़र्च हुआ'


स्मारक
सीएजी के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने दो स्मारकों पर ज़रुरत से अधिक ख़र्च किया.
भारत के नियंत्रक और महालेखाकार ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने दो प्रोजेक्टों में 66 करोड़ रुपए ज़रुरत से अधिक ख़र्च किए हैं.
ये दो परियोजनाएं हैं लखनऊ स्थित भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल और मान्यवर कांशी राम स्मारक स्थल.
इन्हें बनवाने का जिम्मा राजकीय निर्माण निगम के पास था. महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इन परियोजनाओं के लिए 15 करोड़ रुपए में राजस्थान से पत्थर मंगवाए और फिर उन्हें वापस राजस्थान भेजा गया.
इसके अलावा परियोजनाओं के ठेकों में संशोधन कर भी सरकार ने 22 करोड़ रुपए का टाला जा सकने वाला ख़र्च किया.
इस रिपोर्ट के शुक्रवार को उत्तर प्रदेश विधान सभा में रखा गया है.

टाला जा सकने वाला ख़र्च

स्मारक
सीएजी के अनुसार चुनार के पत्थरों को राजस्थान भेजना और वहां से वापस लखनऊ लाना ग़ैर-ज़रुरी था.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों परियोजनाओं के लिए शुरू में 881.22 करोड़ रुपए का बजट था. इसमें से भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल के 366.82 करोड़ रुपए और मान्यवक कांशीराम स्मारक स्थल के लिए 514.4 करोड़ का बजट था.
लेकिन 31 दिसंबर 2009 को ये ख़र्च 2451.93 करोड़ तक पहुंच गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें 2261.19 करोड़ रुपए नवंबर 2007 से दिसंबर 2009 के बीच जारी किए गए.
नियंत्रक और महालेखाकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि इन दोनों परियोजनाओं के लिए मिर्ज़ापुर के चुनार से पत्थर राजस्थान के बयाना में ले जाए गए जहां उनपर कारीगरी करने के बाद उन्हें वापस लखनऊ लाया गया.
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर मिर्ज़ापुर के चुनार में ही पत्थरों को तराशा जाता तो 15.6 करोड़ रुपए बच जाते.

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि राजकीय निर्माण निगम ने कुछ काम ऊंची कीमतों पर करवाए जिसके चलते कई करोड़ रुपए अधिक ख़र्चा हुए.
(साभार बीबीसी हिंदी)

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

सोनिया का इलाज और कांग्रेसी ला इलाज


अमेरिका में होगी सोनिया की शल्यक्रिया, राहुल देखेंगे कामकाज
नई दिल्ली, एजेंसी
First Published:04-08-11 10:20 PM

Last Updated:05-08-11 01:39 AM
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अमेरिका में शल्यक्रिया होगी। इसका खुलासा नहीं किया गया है कि उनकी यह शल्यक्रिया किस परेशानी के चलते होगी। सोनिया ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी सहित चार लोगों के एक समूह का गठन किया है, जो उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी के रोजाना के कामकाज का जिम्मा संभालेगा। वह संभवत: करीब एक महीने तक देश से बाहर रहेंगी। यह नहीं बताया गया है कि किस तकलीफ के चलते उनकी सर्जरी होनी है।
कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने संसद भवन परिसर में इस बारे में संक्षिप्त जानकारी देते हुए संवाददाताओं को बताया था कि 64 वर्षीय सोनिया गांधी को हाल ही में किसी तकलीफ के चलते चिकित्सकों द्वारा शल्यक्रिया की सलाह दी गई थी।

उन्होंने कहा कि हाल में सोनिया गांधी की ऐसी तकलीफ का पता चला जिसमें शल्यक्रिया कराना जरूरी है। चिकित्सकों की सलाह पर वह विदेश गईं हैं। संभावना है कि वह वहां पर दो-तीन सप्ताह रहेंगी।
सोनिया गांधी इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिका के किसी स्थान के लिए रवाना हुई थी। उनके साथ उनके पुत्र राहुल गांधी भी हैं। कांग्रेस इस बारे में चुप है कि सोनिया का इलाज कहां चल रहा है। 
*जनार्दन द्विवेदी ने पहले बताया कि सोनिया का आपरेशन सफल रहा, 
*लेकिन बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन अभी हुआ नहीं है और अगले एक-दो दिन में हो सकता है।
उन्होंने बताया कि सोनिया ने निर्णय किया है कि उनकी गैरमौजूदगी में राहुल गांधी और वरिष्ठ नेता ए के एंटनी, अहमद पटेल और जनार्दन द्विवेदी का समूह पार्टी मामलों की देख-रेख करेगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समिति में सरकार के सिर्फ एक ही मंत्री को शामिल किया गया है। समिति में प्रधानमंत्री मलनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी को शामिल नहीं किये जाने के बारे में पूछने पर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्षा ने पार्टी के काम काज को देखने के लिए चार सदस्यों को जिम्मेदारी दी है। ये सभी पार्टी के वरिष्ठ सदस्य हैं। मैं नहीं समझता कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा बनायी इस समिति के ऊपर कोई टिप्प्णी करने की जरूरत है।
*यह पूछे जाने पर सोनिया गांधी का स्वास्थ्य कैसा है और और उनकी किस तरह की सर्जरी होने वाली है, के जवाब में तिवारी ने इस बारे में विस्तृत जानकारी देने से इंकार किया और कहा कि सार्वजनिक जीवन में जो व्यक्ति हैं, जहां तक उनके सेहत और चिकित्सा का संबंध है, उनको भी थोड़ी बहुत प्राइवेसी का हक है। कृपया आप इस संवेदनशीलता का ख्याल रखें
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(हिंदुस्तान से साभार)
तारांकित वाक्यों को देखें और उनमें कांग्रेसियों की स्वामिभक्ति और बेचारगी पर गौर करें |